टूटी कश्ती छूटा किनारा (स्त्री कथा)
1
टूटी कश्ती छूटा किनारा
लो अब सुनो मेरी भी कहानी
थी अनदेखी बड़ी अनजानी
किसी ने मानी किसी ने न मानी
2
अंधेरे में थी अंधेरे में आयी
खोई थी कहाँ, कहाँ को पायी
था पूरा सन्नाटा हवा साई साई
सोचा क्या खोया क्या पायी
3
थी कहाँ मैं अकेली साथ मेरे थी बहन
किसी के आंख आँसू किसी को न सहन
बहन की सिर्फ मैं और मेरी बस बहन
थी दिल में जमी बर्फ और एक अगन
4
टूटी थी दीवार सूना था आसमाँ
सूने थे अरमाँ मेरे सुने थे जहां
कहती किससे सुनता मुझे कौन
यूँ तो चुप बैठे थे सब, सब थे मौन
5
लड़की का बड़ा होना और बड़ा होना
कुछ पाने में बहुत कुछ का खोना होना
देना क्या फिर लेना क्या, सब गौण
थे अपने सब चुपचाप सब थे मौन
6
सामने थे अंधेरे और रास्ते भी
क्या खुले थे ये किसी के वास्ते भी
पता नहीं था कहां जाना था
क्या खोना था क्या पाना था
7
बिहार की थी यूपी की हुई
पहले नहीं कभी जैसे हुई
थे यहां सब सगे सब अपने
पर मेरे थे कुछ और ही सपने
8
लड़की का समाज में
बस लड़की बनके रहना
किसी से कुछ न कहना
बस चुपचाप आंखों में सहना
9
नहीं था पसंद मुझे कुछ भी ऐसा नहीं
किसी ने मुझे सुना नहीं ऐसा नहीं
पर कोई सुन लेता मुझे ऐसा नहीं
मान लेता मुझे था कुछ ऐसा नहीं
10



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