ग़ज़ल

 









जब आ गए इधर तो आइए

हाल क्या है हमें भी बताइये


माना कि सफर लम्बा रहा होगा 

अन्दाज़-ए-सफ़र भी बताइये


होगा आसान नहीं और आगे

आप ही हमे रास्ता दिखाइए


है क्या ज़िन्दगी और क्या मर्ग 'सहर्ष'

सब कोशिश नाकाम अब समझाइये



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