यहाँ (ग़ज़ल)



हर कोई बन्द है 

बख़्तरबंद दरवाज़े में यहाँ

एक जहाँ, यहाँ

एक बिखरा वहाँ

यहाँ मुस्कुराते लब हैं

कई सूखे फटे  होंठ वहाँ

यहाँ के हिसाब से,

ज़िन्दगी खूबसूरत है

कई तड़पते बिलबिलाते वहाँ

इन्हें तो माना कि मना लेंगे आप

उसका क्या जो बेघर वहाँ

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