अब मत रुको
कल तो तुम
चल रहे थे भला,
अब रुक गए क्यों?
अपने उसूलों पर चलने वाले
तुम झुक गए क्यों?
अभी भी देर नहीं
मंज़िल तेरी सामने
उठा नज़र देख उधर
कोई बुलाता तुझे सामने।
अभी रुक गए,
भला क्या होगा हासिल
समंदर का सफ़र शेष होगा,
शेष रह जाएगा साहिल।
चलो फिर उठो,
यही तेरी नियती,
तुम वीर हुंकार भरो,
अर्जुन सा तुम ध्यान धरो,
भीषण हुंकार करो।



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