वो सूना दरवाज़ा
यहाँ, जहाँ मैं हूँ
मैं नहीं हूँ
जहाँ तुम हो
यहां हवाएँ हैं
इन हवाओं में तुम नहीं
तेरी खुशबू नहीं है।
न तुम हो
न तेरी बातें हैं
न तेरा गुस्सा है
न तेरी हँसी है।
मैं कई के साथ
मगर मेरे साथ कोई नहीं
अब इस अकेलेपन में
मुझे वो तेरा दरवाज़ा
याद है दिल में, आंखों में
मैं गया था, तेरे उस जगह
जहां से तेरे कदम निकलते थे
तेरे कदम रुकते थे
तेरी हँसी हंसती थी
तेरा गुस्सा फूटता था
सब साथ सब अलग
यहां तन्हाई में मुझे
सूना दरवाज़ा याद आता है।
वो दरवाज़ा याद आता है।



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