जो कहते थे... ग़ज़ल


 

जो कहते थे न आएंगे हाथ तेरे

कल परसों ही सड़क पर मिले

उफ़ हम ही नहीं सुन पाए उसे

थे मगर बहुत उनके शिकवे गिले

कहा तो था उसने मैंने सुना नहीं

यादें रह जाएंगी कि हम भी थे मिले

जीना आसान भी नहीं होगा 'सहर्ष'

रहेंगे साथ जब तक उनके सिलसिले

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