नॉमिनी
था साथ जिसका
उसने तोड़ा सपना।
हो गया पराया
था कब अपना।
संजोया सबकुछ
संजोया जिंदगी भर
मिलाया सबको
हुआ अलग सबसे।
सुंदर काया छोड़
जा मिला धूल से
क्या नहीं आई याद
उसे मेरी कभी भूल से?
जाना था उसे
गया छोड़ मुझे
अपने से कैसे
चुपचाप मुंह मोड़ के?
सुना किसी कोने में
नॉमिनी
मैं नहीं समझी
रही बस उलझी।
उसने नहीं समझाया
उसने कभी नहीं बताया।
किसी ने न माना
किसी ने न जाना
मैं थी गैर
मैं रही गैर
नहीं कोई ठिकाना।



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