कैसे?


इत्र थी तेरे हाथ में 

खुशबू उसके पास गयी कैसे?

इत्र तो देता है खुशबू 

जिंदगी उसकी गई कैसे?  

बात तो तुमने की थी खुशबू बांटने की 

यह आग नफरत की फैल गई कैसे? 

कहा था तुमने कि अब कोई डर का मंजर न होगा फिर यह सनसनाती चुप्पी गांव-शहर में फैल गयी कैसे? 

समंदर थी और इसकी लहरें तेज 

तो हर नाव डूब जाती 

बाकी तीन डूब गए और सब रिहा हो गए कैसे? तराजू थी तेरे हाथ में 

तुमने तौल दिया सबको बराबर 

फिर किसी के हिस्से कम आ गए कैसे?

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