आज शिवरात्रि के दिन



आज शिवरात्रि के दिन 

सोचा कुछ नया खाऊंगा 

वह नहीं जो हर दिन 

थोड़ा नया थोड़ा अलग 

बस फिर क्या था 

अब न किसी से पूछना था 

न किसी से कहना था, 

ली अपनी हीरो 

और सवारी शुरू 

मगर गया जिस ठिकाने पर 

वहां था सन्नाटा 

फिर दूसरे ठिकाने पर 

था वहां भी सन्नाटा। 

सोचा करूं क्या 

सिवा इसके लौटना। 

फिर चल पड़ी सवारी 

और वहां, 

जहां अक्सर नहीं जा था।

आज शिवरात्रि के दिन 

बस आज शिवरात्रि के दिन।











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