ग़ज़ल
बहुत हसीन ख्वाब हैं झोपड़ियों में रहने वालों के
ये फिर बहकावे में आ जाएंगे बहलाने वालों के
लेंगे होगी जितनी जरूरत उन्हें यहां जिंदगी की
कोई नहीं देगा जवाब यहां उनके कई सवालों के
हवा ऐसी न जाने क्यों चला रखी है इन लोगों ने
लगी है आग गैरों के घर आग बुझाने वालों के
हां हो तो हां कहो न तो नहीं कहो 'सहर्ष' यहां
ऐसे कब तक बने रहोगे शिकार इन बबालों के


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