ग़ज़ल

आओ चलो चलें वहां सुनसान राहों में

बैठे करेंगे बातें एक दूसरे के बाहों में

जो छूट गए कहीं रास्ते में चलते चलते

निशाँ नहीं है बाकी अब उन राहों में

डर है हमें गुमनाम ना हो जाए कहीं

और थोड़ी देर बैठो हाथ डाले बाहों में

थमता नहीं कभी यह रास्ता देखो जा रहा

चलेंगे थोड़ी दूर और खो जाएंगे इन राहों में

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