ग़ज़ल








किया  इंतज़ार और चल दिया

रास्ता फिर अपना बदल दिया

कल हमने ये नहीं कहा था

आज उसने बयान बदल दिया

था तो खून से रंगा बदन सारा

झट से उसने कपड़ा बदल दिया

फूलों से कहो अपनी हिफ़ाज़त करे

उसने फिर से बागबाँ बदल दिया



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